पश्चिम बंगाल का बेनाग्राम: केवल एक रात के लिए जाग उठता है यह ‘घोस्ट विलेज’
पश्चिम बंगाल के आसनसोल के पास स्थित बेनाग्राम को ‘घोस्ट विलेज’ यानी भूतिया गांव के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यह साल के अधिकांश समय वीरान रहता है। कोजागरी लक्ष्मी पूजा की पूर्णिमा की रात को यह पूरा गांव रोशनी से सज जाता है और यहां विशेष उत्सव मनाया जाता है। इस एक रात के लिए लगभग 300 श्रद्धालु और पूर्व निवासी एकत्र होकर पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेते हैं।

क्यों वीरान हो गया बेनाग्राम?
लगभग 15 से 16 साल पहले, यानी 2008-2009 के आसपास, अधिकांश ग्रामीणों ने अपने पुश्तैनी घरों को छोड़ दिया था। इसके पीछे अलग-अलग कहानियां और कारण बताए जाते हैं। कुछ लोगों का कहना था कि ग्रामीण भूतों के डर से भागे, जबकि अन्य का मानना था कि हिंसक अपराधों और असुरक्षा की भावना के कारण उन्हें यह जगह छोड़नी पड़ी। उस समय गांव में बुनियादी विकास कार्यों की कमी, खराब सड़कें, पीने के पानी की समस्या और बिजली की कमी जैसी परेशानियां आम थीं। हालांकि, लोगों के पलायन का सटीक कारण आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
निवासियों की घर वापसी की उम्मीद
राज्य सरकार में बदलाव के बाद से मूल निवासियों के मन में अपने पुश्तैनी घरों में वापस लौटने की उम्मीद जगी है। लोगों का कहना है कि दूसरे शहरों में किराए के मकानों में रहना बहुत कठिन है और वे अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं। उन्होंने सरकार से सुरक्षा सुनिश्चित करने और सड़क, बिजली तथा पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपील की है, ताकि वे स्थायी रूप से अपने गांव में बस सकें।
लक्ष्मी पूजा की एक रात का जीवन
साल में सिर्फ एक दिन लक्ष्मी पूजा के अवसर पर बेनाग्राम में रौनक लौट आती है। जनरेटर की रोशनी, लाउडस्पीकर पर बजता संगीत और लगभग तीन सौ लोगों के लिए तैयार किया जाने वाला भोग इस गांव की तस्वीर बदल देता है। हालांकि, पूजा समाप्त होते ही सुबह होते ही सभी लोग वापस चले जाते हैं और गांव में फिर से सन्नाटा पसर जाता है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन आगे आए और ऐसा माहौल तैयार करे जिससे यह गांव साल के बाकी दिनों में भी आबाद हो सके।


