जीवन के हर कर्म को योग और यज्ञ की तरह अपनाना जरूरी

जीवन के हर कर्म को योग और यज्ञ की तरह अपनाना जरूरी

पंडित विजयशंकर मेहता के एक आलेख में जीवन प्रबंधन और सफलता को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए गए हैं। उनके अनुसार, जीवन में किए जाने वाले हर कर्म को योग और यज्ञ की तरह मानना अत्यंत आवश्यक है। आज के समय में मनुष्य जिस भी भौतिक यात्रा पर आगे बढ़ रहा है, यदि वह अपने जीवन में योग और यज्ञ को स्थान दे, तो परिस्थितियां भी उसकी सहायता करती हैं।

e0a49ce0a580e0a4b5e0a4a8-e0a495e0a587-e0a4b9e0a4b0-e0a-real-1 जीवन के हर कर्म को योग और यज्ञ की तरह अपनाना जरूरी

युद्ध और यज्ञ का मूल अंतर

प्रबंधन की आधुनिक भाषा में अक्सर यह सिखाया जाता है कि किसी भी कार्य में इस प्रकार कूद पड़ना चाहिए जैसे कोई युद्ध हो, और उद्देश्य केवल जीत हासिल करना होना चाहिए। हालांकि, इसके विपरीत दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने महाभारत का एक प्रसंग साझा किया है। इसमें भीष्म पितामह ने दुर्योधन को समझाया था कि वह प्रतिदिन इसलिए पराजित हो जाते हैं क्योंकि वे केवल युद्ध कर रहे होते हैं, जबकि इसके विपरीत पांडव यज्ञ कर रहे होते हैं। हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों का भी यही मार्गदर्शन रहा है कि मनुष्य को अपने जीवन में प्रत्येक कर्म को एक यज्ञ की भांति संपन्न करना चाहिए।

योग से जुड़ने की अनिवार्यता

किसी भी कर्म को यज्ञ के रूप में ढालने के लिए योग से जुड़ना बेहद जरूरी बताया गया है। योग और योगियों के सान्निध्य का महत्व समझाने के लिए एक पौराणिक कथा का संदर्भ दिया गया है। कथा के अनुसार, एक बार गोरखनाथ ने नेपाल के राजा से दूध मांगा और उसे पीने के बाद राजा के हाथ पर थूक दिया। जब राजा ने अपना हाथ पीछे कर लिया, तो वह दूध उनके पैर पर जा गिरा। इस पर गोरखनाथ ने राजा को सीख दी कि यदि उन्होंने वह दूध अपने हाथ पर लिया होता, तो वे अपनी इंद्रियों के स्वामी यानी योगियों की तरह होते, परंतु पैर पर गिरने के कारण वे केवल भू-स्वामी बनकर रह गए।

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सफलता और योग का संबंध

इस कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि राजाओं और शासकों को हमेशा योग और योगियों से जुड़े रहना चाहिए। वर्तमान समय में सफलता की खोज में निकला हुआ प्रत्येक व्यक्ति अपने आप में एक राजा के समान है। इसलिए यह आवश्यक है कि हर व्यक्ति अपनी व्यस्त जीवनशैली में से कुछ समय निकालकर योग और यज्ञ के लिए समर्पित करे। जब कोई व्यक्ति इस मार्ग को अपने जीवन का हिस्सा बनाता है, तो उसकी भौतिक यात्रा के दौरान सभी स्थितियां उसके अनुकूल होने लगती हैं और उसे सफलता की ओर ले जाने में सहायता प्रदान करती हैं।

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