केंद्रीय सूचना आयोग का राष्ट्रीय महिला आयोग को परामर्श रिकॉर्ड दिखाने का निर्देश
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को वर्ष 2022 के दौरान आयोजित क्षेत्रीय परामर्शों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच एक आरटीआई आवेदक को कराने का निर्देश दिया है। यह परामर्श महिलाओं के अधिकारों के दृष्टिकोण से आपराधिक कानूनों की समीक्षा की प्रक्रिया के तहत आयोजित किए गए थे। सूचना आयुक्त पी.आर. रमेश ने एनसीडब्ल्यू के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी को आदेश मिलने के दो सप्ताह के भीतर सभी प्रासंगिक भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों की जांच का अवसर प्रदान करने को कहा है।

आपराधिक कानूनों की समीक्षा और परामर्श प्रक्रिया
केंद्र सरकार के अनुरोध पर एनसीडब्ल्यू ने भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में बदलाव के सुझाव मांगे थे। इसके बाद आयोग ने वर्ष 2022 के शुरुआती महीनों में क्षेत्रीय स्तर पर कई बैठकें की थीं और 4 मार्च 2022 को केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशों की एक समेकित रिपोर्ट सौंपी थी। बाद में इन पुराने कानूनों की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू किए गए, जो 1 जुलाई 2024 से प्रभावी हुए।
आरटीआई आवेदन और आयोग की टिप्पणी
आवेदक संजुक्ता बसु ने आरटीआई के तहत पांचों क्षेत्रीय परामर्शों के विवरण मांगे थे, जिसमें तिथियां, स्थान, आयोजन करने वाले संस्थान, प्रतिभागी और बैठकों की रिपोर्ट की प्रतियां शामिल थीं। सुनवाई के दौरान उन्होंने तर्क दिया कि समेकित रिपोर्ट में क्षेत्रीय बैठकों का उल्लेख तो है, लेकिन व्यक्तिगत रिपोर्ट और चर्चाओं का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। वहीं, एनसीडब्ल्यू ने आयोग को बताया कि कुछ परामर्श ऑनलाइन आयोजित किए गए थे और उनसे जुड़े भौतिक दस्तावेज उनके पास उपलब्ध नहीं हैं।
दस्तावेजों की जांच का अधिकार
आयोग ने स्पष्ट किया कि आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2(j) के तहत दस्तावेजों और रिकॉर्ड का निरीक्षण करने तथा प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने का अधिकार शामिल है। सीआईसी ने एनसीडब्ल्यू को यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है या संरक्षित नहीं रखी गई है, तो रिकॉर्ड की गहन जांच के बाद इसकी स्पष्ट जानकारी दी जाए।


