अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में भारत को मिली बड़ी जिम्मेदारी, लगातार तीसरी बार चुना गया अध्यक्ष
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) में भारत के नेतृत्व को एक बार फिर वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है, जहां देश को लगातार तीसरी बार इस संगठन का अध्यक्ष चुना गया है। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इसकी औपचारिक घोषणा करते हुए बताया कि सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से भारत के पक्ष में अपना भरोसा जताया है। इस महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट के दौरान आयोजित आईएसए के नौवें सत्र में की गई।

फ्रांस को मिला सह-अध्यक्ष पद
इस चुनाव के दौरान फ्रांस को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के सह-अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने फ्रांस को दोबारा सह-अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी और सभी सदस्य देशों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक मंच पर सौर ऊर्जा के फायदों को सभी राष्ट्रों तक समान रूप से पहुंचाने के लिए पूरी तरह समर्पित है। यह पहल ‘पावर टू एम्पावर’ के दृष्टिकोण और ‘एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड’ के बुनियादी सिद्धांत पर आगे बढ़ रही है।
वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा का विस्तार
वर्ष 2015 में भारत और फ्रांस के सह-प्रयासों से स्थापित इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर स्वच्छ और हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है। शुरुआत में सीमित दायरे से शुरू हुआ यह संगठन अब बढ़कर 130 हस्ताक्षरकर्ता और सदस्य देशों तक पहुंच चुका है। वर्तमान में यह गठबंधन विकासशील और गरीब देशों में सौर ऊर्जा के लिए नए रास्ते तलाशने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
निवेश और कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान
अपने नए कार्यकाल के दौरान भारत सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता जुटाने, उन्नत तकनीकों के विकास और सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने पर खास जोर देगा। अफ्रीका में निवेश बढ़ाने के लिए 20 करोड़ डॉलर की ‘अफ्रीका सोलर फैसिलिटी’ पहल के तहत भारत ने भी करीब 25 मिलियन डॉलर देने का संकल्प लिया है। इसके साथ ही, पीएम-कुसुम योजना का हवाला देते हुए सोलर पंप और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई के माध्यम से किसानों की लागत घटाने और उनकी आमदनी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।


