राम मंदिर दान चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बंद की निगरानी, सीबीआई जांच की मांग खारिज

राम मंदिर दान चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बंद की निगरानी, सीबीआई जांच की मांग खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन की जांच के मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं को बंद कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अदालत में चार्जशीट दाखिल करने की जानकारी दिए जाने के बाद सर्वोच्च अदालत ने यह कदम उठाया है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की बेंच के समक्ष हुई।

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सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस मामले में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है। उन्होंने अदालत को जानकारी दी कि पैसे की चोरी गिनती के दौरान की जा रही थी। हालांकि सीसीटीवी फुटेज 45 दिनों के बाद ऑटो-इरेज़ तकनीक के कारण उपलब्ध नहीं थी, लेकिन जांचकर्ताओं ने आरोपियों के बैंक खातों और संपत्ति की खरीद की जांच करके पैसों के लेन-देन के रास्ते का पता लगा लिया।

इस तरह की गई पैसों के लेन-देन की जांच

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने चोरी की गई रकम को बैंक खातों में जमा किया था या संपत्तियों में निवेश किया था। जांच के दौरान आरोपियों के पुराने बैंक खातों की जांच की गई और यह देखा गया कि खातों में कितनी रकम जमा की गई थी। इसके अलावा, संपत्ति की खरीद के दस्तावेजों की भी गहन छानबीन की गई, जिसमें कम कीमत दिखाकर अधिक मूल्य की संपत्ति खरीदने के सबूत मिले। इन सभी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर में एक नियमित ऑडिट किया जाता है और सभी मूल्यवान वस्तुएं तथा चढ़ावा पूरी तरह सुरक्षित हैं।

याचिकाकर्ताओं को दी गई यह छूट

अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता दी है कि वे निचली अदालत या न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही में सहायता कर सकते हैं। चूंकि इस मामले में जनहित का पहलू भी शामिल है, इसलिए कानून के अनुसार पीड़ितों को अदालत की सहायता करने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की खूबियों या आरोपों के गुणों पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है ताकि किसी भी पक्ष पर कोई असर न पड़े।

राज्य सरकार द्वारा स्थिति रिपोर्ट दाखिल किए जाने और चार्जशीट पेश किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी संबंधित याचिकाओं का निपटारा कर दिया है।

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