Uttarakhand Disaster: मुख्यमंत्री धामी से मिली अंतर-मंत्रालयी टीम, नुकसान का लिया जायजा

उत्तराखंड आपदा प्रबंधन मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण: केंद्रीय टीम

IMG-20250910-WA0034 Uttarakhand Disaster: मुख्यमंत्री धामी से मिली अंतर-मंत्रालयी टीम, नुकसान का लिया जायजा

DEHRADUN: उत्तराखंड में आपदा से हुए नुकसान का आकलन करने आई भारत सरकार की अंतर-मंत्रालयी टीम ने बुधवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की।

मुख्यमंत्री धामी ने टीम से बातचीत के दौरान कहा कि उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। मानसून अवधि में राज्य को अतिवृष्टि, भूस्खलन, बाढ़ और जलभराव जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भूस्खलन से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को मिलकर अधिक उन्नत पूर्वानुमान प्रणाली विकसित करनी होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस वर्ष भारी वर्षा के कारण राज्य को व्यापक नुकसान उठाना पड़ा है। जनहानि के साथ ही बड़ी संख्या में परिसंपत्तियां क्षतिग्रस्त हुई हैं।

उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं से भूमि को स्थायी नुकसान होता है, जिससे प्रभावित स्थानों पर दोबारा कृषि या निर्माण कार्य कर पाना संभव नहीं हो पाता। इस चुनौती से निपटने के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है।

अंतर-मंत्रालयी टीम के सदस्य उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, बागेश्वर और नैनीताल जिलों के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर चुके हैं। गृह मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना के नेतृत्व में आई इस टीम में अनु सचिव शेर बहादुर, अधीक्षण अभियंता सुधीर कुमार, उप निदेशक विकास सचान, मुख्य अभियंता पंकज सिंह और निदेशक डॉ. वीरेन्द्र सिंह शामिल थे।

टीम ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से बातचीत के दौरान मिले अनुभवों का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार के राहत और पुनर्वास कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राहत शिविरों में प्रभावितों के लिए भोजन, आवास, चिकित्सा और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था संतोषजनक रही है।

केंद्रीय टीम ने राज्य सरकार द्वारा मृतकों के परिजनों और पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के मालिकों को तात्कालिक सहायता राशि के रूप में पाँच लाख रुपये उपलब्ध कराए जाने की भी प्रशंसा की। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं का संपूर्ण डाटा जिला प्रशासन के पास उपलब्ध होना और उनके सुरक्षित प्रसव हेतु लगातार संपर्क बनाए रखने की पहल को टीम ने एक अनुकरणीय कदम बताया। टीम ने कहा कि इस तरह की पहल को अन्य राज्यों में भी अपनाने की सिफारिश की जाएगी।

टीम के सदस्यों ने यह भी इंगित किया कि भूस्खलन और बाढ़ से नदियों में अत्यधिक सिल्ट जमा होने के कारण जलस्तर बढ़ गया है, जिससे भविष्य में और नुकसान की संभावना बनी हुई है।

इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, अपर मुख्य सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन तथा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद स्वरूप भी उपस्थित रहे।

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