Ganga Cleanliness Drive: डीएम का चन्द्रेश्वर नाला निरीक्षण, दूषित जल पर सख्त कार्रवाई

DM inspects Chandreshwar Nala, orders strict action to stop sewage from entering the Ganga.

IMG-20260128-WA0094 Ganga Cleanliness Drive: डीएम का चन्द्रेश्वर नाला निरीक्षण, दूषित जल पर सख्त कार्रवाई

गंगा की पवित्रता से कोई समझौता नहीं: डीएम ने चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र का किया स्थलीय निरीक्षण

मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन सख्त, बिना उपचारित दूषित जल के प्रवाह पर पूर्ण प्रतिबंध
25 घरों के पाइप-ड्रेन्स सीज, तीन दिन में नालियों को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने के निर्देश

IMG-20260128-WA0089-scaled-1 Ganga Cleanliness Drive: डीएम का चन्द्रेश्वर नाला निरीक्षण, दूषित जल पर सख्त कार्रवाई

देहरादून/ऋषिकेश:
ऋषिकेश स्थित चन्द्रेश्वर नाले से बिना उपचारित गंदे पानी एवं ठोस कचरे के गंगा नदी में प्रवाहित होने की प्राप्त शिकायतों को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने बुधवार को चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित विभागों को नाले के समुचित उपचार, सफाई एवं प्रदूषण रोकथाम हेतु विस्तृत रिपोर्ट एवं ठोस कार्ययोजना शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग एवं महाप्रबंधक, निर्माण वृत्त (गंगा), उत्तराखंड पेयजल निगम द्वारा नाले का संपूर्ण नक्शा, वर्तमान स्थिति एवं प्रस्तावित एक्शन प्लान से जिलाधिकारी को अवगत कराया गया।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी परिस्थिति में दूषित जल गंगा नदी में प्रवाहित न हो। उन्होंने कहा कि गंगा में मिलने वाले सभी नालों का जल शोधन के बाद ही प्रवाहित होना अनिवार्य है।
उन्होंने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि चाहे 07 विभागों के वरिष्ठतम प्रतिष्ठान हों या आवासीय भवन—यदि गंदा पानी गंगा में बहाया गया, तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

निरीक्षण के दौरान नाले में वेस्ट-वाटर प्रवाहित करते पाए गए 25 घरों के पाइप-ड्रेन्स को तत्काल सीज करने के निर्देश नगर आयुक्त एवं जल संस्थान को दिए गए। साथ ही वार्ड संख्या-3 के गली-मोहल्लों में पैदल निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने गलियों में बह रही नालियों को तीन दिवस के भीतर सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने समस्या की गंभीरता को देखते हुए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता वृद्धि के लिए शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने को कहा तथा बिना उपचारित गंदे पानी की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गंगा की स्वच्छता एवं पवित्रता बनाए रखने हेतु एक समग्र कार्ययोजना तैयार कर शासन को प्रेषित की जाएगी, ताकि प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंगा को निर्मल रखा जा सके।

उन्होंने बताया कि नगर क्षेत्र का अधिकांश भाग सीवरेज नेटवर्क से आच्छादित है, किंतु जहां सीवरेज कार्य प्रगति पर है अथवा प्रतिष्ठानों व आवासीय भवनों के कनेक्शन अभी नहीं जुड़े हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर कनेक्शन सुनिश्चित किए जाएंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरसेप्शन एवं ड्रेनेज प्लान के अंतर्गत एसटीपी विस्तार की योजना पर कार्य किया जा रहा है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी।

नगर निगम, उपजिलाधिकारी, सीवरेज अनुरक्षण इकाई, उत्तराखंड पेयजल निगम, जल संस्थान एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आपसी समन्वय से विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी, ताकि आम जनता भी इस प्रक्रिया से अवगत रह सके।

सीवरेज अनुरक्षण इकाई के अधिकारियों ने अवगत कराया कि ऋषिकेश में 7.50 एमएलडी क्षमता का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत ढालवाला–मुनिकीरेती योजना के तहत निर्मित किया गया है। सीमित भूमि उपलब्धता के कारण यह बहुमंजिला स्वरूप में निर्मित देश का प्रथम एसटीपी है, जो अक्टूबर 2020 से अनुरक्षणाधीन है।

यह एसटीपी तीन प्रमुख नालों—श्मशान घाट नाला, चन्द्रेश्वर नगर नाला एवं ढालवाला नाला—के शोधन हेतु बनाया गया है। वर्षा ऋतु के दौरान ढालवाला नाले में प्रवाह एसटीपी की क्षमता से अधिक हो जाता है, हालांकि श्मशान घाट एवं चन्द्रेश्वर नगर नाले का संपूर्ण सीवेज एसटीपी में उपचारित किया जाता है।

मानसून एवं उसके पश्चात लगभग चार माह तक ढालवाला नाले में भूमिगत जल की मात्रा अधिक होने के कारण जल गुणवत्ता परीक्षण में प्रदूषण का स्तर न्यून पाया जाता है। नाले के दोनों ओर ड्रोन सर्वे एवं घर-घर सर्वेक्षण किया जा रहा है। प्रारंभिक सर्वे में 502 परिवार चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 38 परिवारों का सीवेज सीधे नाले में तथा 84 परिवारों का ग्रे-वाटर नाले में प्रवाहित पाया गया है। सर्वेक्षण एवं आंकड़ों का सत्यापन जारी है तथा नमूनों की जांच एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला से कराई जा रही है।

इस अवसर पर उपजिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहरा, नगर आयुक्त राम कुमार बिनवाल, सीओ पुलिस पूर्णिमा गर्ग सहित सीवरेज अनुरक्षण इकाई, जल निगम, जल संस्थान, सिंचाई विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

 

 

 

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