पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान पर विवाद, राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया
पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी की ओर से दिए गए एक विवादित बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अंसारी ने एक कार्यक्रम के दौरान एक पुस्तक का हवाला देते हुए देश के लिए हिंदू दक्षिणपंथी प्रवृत्तियों को बड़ा खतरा बताया था, जिसके बाद विभिन्न पक्षों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

पुस्तकालय और व्याख्यान के दौरान दिया गया संदर्भ
नई दिल्ली में आयोजित एक स्मृति व्याख्यान में बोलते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति ने संविधान विशेषज्ञ और लेखक एजी नूरानी की एक पुस्तक की प्रस्तावना का उल्लेख किया था। उन्होंने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने साम्यवाद के मुकाबले हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को देश के लिए अधिक गंभीर चुनौती माना था। इसके साथ ही, उन्होंने नागरिक राष्ट्रवाद के स्थान पर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बढ़ते प्रभाव पर भी अपनी चिंता जाहिर की थी।
विश्व हिंदू परिषद और अन्य संगठनों की कड़ी आपत्ति
इस बयान के सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। विहिप के प्रवक्ताओं का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को आहत करती हैं और संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति को सामाजिक विविधता का ध्यान रखना चाहिए। आलोचकों का तर्क है कि देश में विभिन्न प्रकार की चरमपंथी विचारधाराएं सक्रिय रही हैं, और किसी एक विशेष समुदाय के पुनरुत्थान को इस प्रकार जोड़ना उचित नहीं है।
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी जताई असहमति
इस पूरे मामले पर केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि कुछ प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए हैं। अखिल भारतीय इमाम संगठन और ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस प्रकार की बयानबाजी से समाज में अनावश्यक तनाव पैदा हो सकता है। धर्मगुरुओं ने इस बात पर जोर दिया कि हर किसी को ऐसी भाषा के प्रयोग से बचना चाहिए जिससे किसी समुदाय के बीच दूरियां बढ़ें या नफरत फैले।


