जेवर बस हादसे के बाद ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट ने सिस्टम की खामियों पर उठाए गंभीर सवाल

जेवर बस हादसे के बाद ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट ने सिस्टम की खामियों पर उठाए गंभीर सवाल

यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर के पास हुई निजी डबल-डेकर स्लीपर बस की दुर्घटना ने देश की परिवहन व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस दर्दनाक हादसे में कई यात्रियों की जान चली गई, जिसके बाद प्रशासन और नियमों की अनदेखी करने वाले ट्रांसपोर्टर्स की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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तकनीकी और प्रशासनिक विफलता

दिल्ली परिवहन विभाग के पूर्व उप आयुक्त अनिल कुमार चिकारा ने इस घटना को किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के हादसों के पीछे निर्माताओं, वाहन मालिकों और सरकार की अनदेखी जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं। जब तक बुनियादी नियमों का पालन नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी दुर्घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा।

इलेक्ट्रिकल विफलता और सुरक्षा उपाय

विशेषज्ञ के अनुसार, चलते वाहन में अचानक आग लगने की घटना मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल फेलियर की ओर इशारा करती है। स्थानीय स्तर पर बस बॉडी तैयार करने वाली कई इकाइयां आधुनिक मल्टीप्लेक्सिंग तकनीक का उपयोग नहीं करती हैं, जिसके कारण एक छोटा सा शॉर्ट सर्किट भी पूरी बस को राख में बदल देता है। इसके अलावा, स्थानीय निकायों और फिटनेस सेंटरों द्वारा बिना वास्तविक जांच के ही फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिए जाते हैं।

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जिम्मेदारी तय करने की मांग

देशभर में तकनीकी निरीक्षण प्रणाली की स्थिति पर भी चिंता जताई गई है, जहां तकनीकी पदों पर गैर-तकनीकी कर्मचारियों द्वारा काम संभाला जा रहा है। हादसों के बाद कुछ दिनों की सख्ती के बाद सब कुछ भुला दिया जाता है। इस मामले में विभिन्न विभागों और संगठनों ने भी सरकार को पत्र लिखकर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में भारी कमियों को दूर करने की मांग की है।

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