बांस से बनी रेलवे इंजन की अनूठी कला, नेपाल के संग्रहालय में होगी प्रदर्शित
पश्चिम बंगाल के चंद्रनगर के रहने वाले एक कुशल शिल्पकार ने बांस के टुकड़ों से एक ऐसा रेलवे इंजन तैयार किया है, जो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। बांस से बनी यह अनोखी कलाकृति आगामी अक्टूबर महीने में नेपाल के राष्ट्रीय रेलवे संग्रहालय में प्रदर्शित की जाएगी। कलाकार की इस अनूठी कला ने देश के साथ-साथ विदेशों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है।

बांस से तैयार होते हैं बेहतरीन मॉडल
शिल्पकार गणेश भट्टाचार्य अपनी इस कला के लिए बांस की विशेष किस्मों का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें असम से मंगाया जाता है। वे दरांती और चाकुओं की मदद से बांस को तराशकर इंजन के विभिन्न हिस्से बनाते हैं और उन्हें बिना धातु के चिपकाने वाले पदार्थों की सहायता से जोड़ते हैं। उनके द्वारा बनाए गए मॉडल में केवल ट्रेनें ही शामिल नहीं हैं, बल्कि उन्होंने हावड़ा ब्रिज और विक्टोरिया मेमोरियल जैसी प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारतों की प्रतिकृतियां भी तैयार की हैं। एक मॉडल को पूरा करने में उन्हें आमतौर पर एक से दो महीने का समय लगता है।
रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज हुई उपलब्धि
उनकी कलाकारी को हाल ही में तब बड़ी सफलता मिली जब उनके द्वारा बनाए गए 22 इंच लंबे, 4.5 इंच चौड़े और 9 इंच ऊंचे डब्ल्यूडीपी-4 डीजल लोकोमोटिव मॉडल को भारत और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में मान्यता मिली। इसके बाद उन्होंने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के लिए भी आवेदन किया है। उनका यह सफर करीब 22 साल पहले शुरू हुआ था, जब उन्होंने शुरुआत में कप, ट्रे और फूलों के गुलदस्ते बनाए थे। समय के साथ उन्होंने विंटेज कारों, बसों, ट्राम और विभिन्न प्रकार के रेल इंजन के मॉडल बनाना शुरू किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की योजना
अपनी कला को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए उन्होंने कई देशों के संग्रहालयों से संपर्क किया है। नेपाल के अलावा नामीबिया और केन्या के रेलवे संग्रहालयों में भी उनके मॉडल प्रदर्शित किए जाने की योजना है। कलाकार का मानना है कि उनका मुख्य उद्देश्य केवल धन कमाना नहीं, बल्कि अपनी कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है।


