भारतीय रासायनिक उद्योग में सुधार के संकेत, पूंजी पर रिटर्न में लग सकते हैं दो-तीन साल
भारतीय रासायनिक उद्योग ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान आई मंदी से उबरना शुरू कर दिया है, हालांकि कंपनियों को अपनी पूंजी पर बेहतर रिटर्न देखने के लिए अभी दो से तीन साल का इंतजार करना पड़ सकता है। एक ताजा सेक्टर रिपोर्ट के अनुसार, इस उद्योग में बड़े पैमाने पर स्थापित क्षमताओं का उपयोग होने में समय लग रहा है।

कमाई में सुधार और क्षमता उपयोग
रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनियों की कमाई में रिकवरी के शुरुआती संकेत दिखाई देने लगे हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सूचीबद्ध रासायनिक कंपनियों के राजस्व में साल-दर-साल आधार पर अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है और अधिकांश कंपनियों का प्रदर्शन सकारात्मक रहा है। हालांकि, मार्फत और मार्जिन में सुधार तो दिखने लगा है, लेकिन पिछले निवेशों का पूरा लाभ मिलने में वक्त लग रहा है।
चुनौतियां और वैश्विक कारक
उद्योग के सामने मुख्य चुनौती पहले के दौर में तैयार की गई अतिरिक्त क्षमताओं का सही उपयोग करना है। स्थापित स्पेशलिटी केमिकल संयंत्र अभी मध्यम स्तर पर काम कर रहे हैं, जबकि नए चालू हुए संयंत्रों का उपयोग स्तर काफी कम है। इसके अलावा, कच्चे तेल और ढुलाई लागत में उतार-चढ़ाव का असर भी कीमतों पर देखा गया है, जबकि एग्रोकेमिकल्स उप-खंड में राजस्व के रुझान अभी भी सुस्त बने हुए हैं।
लंबी अवधि के विकास के अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों का यह दौर मुख्य रूप से चक्रीय और क्षमता से जुड़ा हुआ था, न कि उद्योग की संरचनात्मक कमजोरी। भारत का स्पेशलिटी केमिकल्स बाजार आने वाले वर्षों में मजबूत दर से आगे बढ़ने का अनुमान है। घरेलू मांग, आयात के विकल्प तलाशने और उन्नत रसायन विज्ञान के दम पर इस क्षेत्र को भविष्य में नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।


