कोलकाता में पेयजल संकट पर टीएमसी सांसद ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निकाय को लिखा पत्र
तृणमूल कांग्रेस के राज्य सभा सांसद समीरुल इस्लाम ने कोलकाता की ज्योति नगर कॉलोनी में उत्पन्न गंभीर पेयजल संकट के मामले में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस इलाके में जानबूझकर जलापूर्ति बाधित की गई है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

पेयजल संकट और स्थानीय निवासियों की मुश्किलें
सांसद द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उत्तर कोलकाता के चित्रपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ज्योति नगर कॉलोनी में लगभग दो महीनों से नियमित पेयजल की आपूर्ति बंद है। सरकारी पाइपलाइन के जरिए पानी की आपूर्ति रुकने से करीब पांच हजार लोगों की आबादी प्रभावित हुई है। स्थानीय स्तर पर कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा टैंकरों से पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह मात्रा बड़ी आबादी के लिए बेहद नाकाफी साबित हो रही है। पानी की भारी कमी के कारण बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राजनीतिक भेदभाव और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का हवाला
पत्र में आरोप लगाया गया है कि राजनीतिक कारणों से इस अल्पसंख्यक बहुल इलाके की बुनियादी नागरिक सुविधाओं को छीना गया है। सांसद ने अपने दौरे के दौरान स्थानीय परिवारों से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया था। पत्र में पेयजल को एक मौलिक मानवाधिकार बताते हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और संयुक्त राष्ट्र समिति के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया गया है, जिसके तहत सुरक्षित पानी तक पहुंच गरिमापूर्ण जीवन के लिए आवश्यक है।
बीमारी फैलने की आशंका और यूएन से चार प्रमुख मांगें
नियमित जलापूर्ति न होने के कारण क्षेत्र में अस्वच्छता की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे किसी गंभीर बीमारी या महामारी के फैलने का खतरा मंडरा रहा है। सांसद ने इस मानवीय संकट पर संयुक्त राष्ट्र से चार प्रमुख बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने और निगरानी रखने का अनुरोध किया है:
- ज्योति नगर कॉलोनी में लंबे समय से पेयजल आपूर्ति बंद होने का वास्तविक कारण सामने लाया जाए।
- प्रभावित निवासियों को सुरक्षित और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी जाए।
- स्थायी पाइपलाइन कनेक्शन को बहाल करने की योजनाओं का विवरण मांगा जाए।
- बच्चों और बुजुर्गों जैसे संवेदनशील समूहों को स्वास्थ्य जोखिमों से बचाने के उपायों पर बात हो।
अंत में यह जोर दिया गया है कि साफ पानी कोई दान या उपहार नहीं, बल्कि जीवन के लिए एक बुनियादी आवश्यकता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानवाधिकार है।


