सिक्किम के नए राज्यपाल दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर राजनीति गरड़ाई, कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष दुष्यंत गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जिसके बाद देश की राजनीति में एक नया विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने इस नियुक्ति का कड़ा विरोध करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं भाजपा ने भी इन आरोपों का तीखा जवाब दिया है।

कांग्रेस ने नियुक्ति पर उठाए सवाल और जताया विरोध
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रमुख गणेश गोदियाल ने देहरादून में दुष्यंत गौतम की गवर्नर के तौर पर नियुक्ति के खिलाफ एक घंटे के मौन उपवास की घोषणा की थी। कांग्रेस का यह आरोप है कि उत्तराखंड में रिसॉर्ट रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हुई कथित हत्या के मामले में दुष्यंत गौतम का नाम सामने आया था। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अंकिता के माता-पिता द्वारा एक वीआईपी के रूप में उनका नाम लिए जाने के बावजूद उन्हें राज्यपाल बनाया जाना आम जनता की भावनाओं को आहत करने वाला है। पार्टी ने यह भी दावा किया कि इस पद पर नियुक्ति मिलने से उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई से बचाव हो सकता है क्योंकि राज्यपाल पद पर रहते हुए मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।
भारतीय जनता पार्टी का तीखा पलटवार
कांग्रेस के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तराखंड भाजपा के राज्य मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कांग्रेस पार्टी पर जोरदार पलटवार किया है। भाजपा ने कांग्रेस सांसद ए. बिमोल अकोइजम पर जेएनयू की छात्राओं द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों और उस मामले पर कांग्रेस की चुप्पी को लेकर सवाल खड़े किए। मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि इन आरोपों के बाद उन्हें पीओएसएच (POSH) फ्रेमवर्क के तहत जांच के बाद बर्खास्त किया गया था।
इसके साथ ही, भाजपा नेता ने यह भी कहा कि राज्य के कांग्रेस नेताओं को राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए धरने और उपवास करने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए और अपनी ही पार्टी के नेताओं जैसे दिग्विजय सिंह और अजय राय के बयानों पर बोलना चाहिए, जो कथित तौर पर पार्टी की महिला नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करते रहे हैं।


