आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की उम्मीद, विदेश मंत्री जयशंकर का अमेरिकी समकक्ष को संदेश
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से दोटूक शब्दों में कहा है कि भारत अपने साझेदारों से आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की उम्मीद करता है। यह स्पष्ट संदेश भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते कूटनीतिक संपर्कों के दौरान सामने आया है, जो आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
मुंबई में द्विपक्षीय बैठक और श्रद्धांजलि
मंगलवार को मुंबई में अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित ‘फ्रीडम-250’ समारोह के दौरान यह बातचीत हुई। इस मुलाकात से पहले दोनों नेताओं ने ताज होटल स्थित स्मारक पर जाकर मुंबई आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ मिलकर खड़े होने का संकल्प भी दोहराया गया। हालांकि इस कड़े संदेश के बावजूद दोनों पक्षों ने इस वार्ता को सकारात्मक बताया और रिश्तों में किसी भी प्रकार के तनाव से इनकार किया।
व्यापार, रक्षा और तकनीक पर चर्चा
दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की इस उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक में व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा और आपसी जनसंपर्क जैसे तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। नेताओं ने क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा किए। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत और अमेरिका के संबंधों को 21वीं सदी की दिशा तय करने वाला एक अहम रिश्ता करार दिया। उन्होंने सुरक्षित तथा मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र और मुक्त व्यापार के महत्व पर विशेष जोर दिया।
बदलती वैश्विक व्यवस्था और साझेदारी
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि आज की बदलती वैश्विक व्यवस्था में देश अपने राष्ट्रीय हितों के मुताबिक कदम उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका ने भारत के विकास में सहयोग किया है, जबकि भारतीय प्रतिभा ने अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। दोनों नेताओं ने माना कि हालांकि अतीत में कुछ जटिल मुद्दे रहे हैं, लेकिन रक्षा, ऊर्जा और नागरिक उड्डयन जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग लगातार मजबूत हुआ है और साझेदारी का दायरा बढ़ा है।


