उत्तराखंड: बाबा नीम करौली के बड़े पुत्र का निधन, भक्तों में शोक की लहर
नीम करौली महाराज (Baba Neem Karoli Aneg Singh) के नजदीकी रहे गिरीश तिवारी बताते हैं कि अनेग सिंह का कैंची धाम से विशेष लगाव था और वे कई बार कैंची धाम आया जाया करते थे
नीम करौली महाराज (Baba Neem Karoli Aneg Singh) के नजदीकी रहे गिरीश तिवारी बताते हैं कि अनेग सिंह का कैंची धाम से विशेष लगाव था और वे कई बार कैंची धाम आया जाया करते थे
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Toggleबाबा नीम करौली का जन्म सन 1900 में फर्रुखाबाद में हुआ था। उनका असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। 11 साल की छोटी सी उम्र में ही उनका विवाह हो गया था। उनके दो पुत्र और एक पुत्री हुईं। विवाह के कुछ वर्ष बाद करौरी महाराज ने गृह त्याग कर संन्यासी बनाने का निर्णय कर लिया था। माना जाता है कि वर्षों के तप के बाद नीम करौली बाबा को सिद्धियां प्राप्त हुईं थीं।
कहा जाता है कि नीम करौली महाराज हनुमान जी के बहुत बड़े भक्त थे। भक्त भी उन्हें साक्षात हनुमान जी का अवतार मानते थे। उन्होंने 1964 में 15 जून के दिन ही भवाली (नैनीताल) में कैंची क्षेत्र में स्थित अपने आश्रम में श्री हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की थी। आगे चलकर बाबा के सेवा कार्यों के चलते ये विश्व प्रसिद्ध तीर्थ कैंची धाम बना।
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