एससी-एसटी एक्ट संशोधन: सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत पर रोक जारी रखी, याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के 2018 संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही अधिनियम के तहत अग्रिम जमानत पर लगी रोक पूरी तरह से जारी रहेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2020 में इस मामले पर विस्तृत फैसला आ चुका है, इसलिए अब किसी प्रकार के पुनर्विचार की आवश्यकता नहीं है।

याचिका पर सुनवाई से इनकार
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने बृजभूषण सैनी द्वारा दायर इस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया था कि अग्रिम जमानत पर कानूनी रोक से विपरीत स्थिति पैदा हो सकती है और इसके दुरुपयोग की संभावना बनी रहती है। साथ ही मामलों में सजा की कम दर और मुआवजे के वितरण को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
सुरक्षा उपाय पहले से तय
शीर्ष अदालत ने दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि संशोधित प्रावधानों के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय पहले से ही निर्धारित किए जा चुके हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2020 में शीर्ष अदालत इन संशोधनों को पूरी तरह सही ठहरा चुकी है।
संशोधन का पृष्ठभूमि
संसद ने वर्ष 2018 में कानून में संशोधन कर धारा 18ए जोड़ी थी, जिसके जरिए अग्रिम जमानत पर रोक को बहाल किया गया था और एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच या गिरफ्तारी से पहले पूर्व स्वीकृति की अनिवार्यता को हटाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा निर्णय के बाद अब कानूनी स्थिति यथावत बनी हुई है।


