सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: विदेशी अदालतों के अनिर्णित मामलों में एंटी-सूट इंजंक्शन देना सही नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि भारतीय अदालतों को सामान्यतः विदेशी अदालतों में चल रही अधूरी और अनिर्णित कानूनी कार्यवाही के बीच दखل देते हुए एंटी-सूट इंजंक्शन यानी रोक आदेश जारी करने से बचना चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें ब्रिटेन की एक अदालत में चल रहे पारिवारिक विवाद से जुड़े मुकदमे को चुनौती दी गई थी।

अदालतों के लिए न्यायिक विवेक और सिद्धांत
न्यायालय की बेंच ने स्पष्ट किया कि एंटी-सूट इंजंक्शन का आदेश देना कोई नियमित न्यायिक प्रक्रिया नहीं है और इसे बिना ठोस आधार के आसानी से नहीं दिया जाना चाहिए। जब तक कोई स्पष्ट कानूनी या अधिकार क्षेत्र से जुड़ा मजबूत कारण न हो, तब तक अदालतों को विदेशी न्यायालयों की कार्यवाही में बाधा डालने वाले ऐसे आदेश देने में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
विदेशी मामलों में महत्वपूर्ण कारक
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित दंपती ने अपने वैवाहिक जीवन का अधिकांश समय लंदन में बिताया था और वहां उनका पारिवारिक घर तथा वित्तीय व्यवस्थाएं थीं। अदालत ने माना कि महिला द्वारा यूके की अदालत में शुरू की गई कार्यवाही मजबूत और वास्तविक आधारों पर आधारित थी। ऐसी स्थिति में, जब तक विदेशी अदालत का फैसला अंतिम चरण में न पहुंच जाए, तब तक रोक लगाने का कोई वैध या तार्किक कारण नहीं बनता है।
निचली अदालत की गलती पर टिप्पणी
शीर्ष अदालत ने अलीपुर ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को त्रुटिपूर्ण माना, जिसमें यूके फैमिली कोर्ट की कार्यवाही पूरी होने से पहले ही एंटी-सूट इंजंक्शन दे दिया गया था। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें ट्रायल कोर्ट के रोक आदेश को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने यह भी कहा कि इस आदेश का पक्षकारों द्वारा भविष्य में की जाने वाली कानूनी कार्रवाइयों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।


