संभल मस्जिद सर्वे विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने संभल की शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद में एक अदालत द्वारा दिए गए सर्वेक्षण के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुक्रवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ द्वारा की गई।

याचिकाएं और दलीलें
यह पीठ संभल की जामा मस्जिद की प्रबंधन समिति द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 19 मई 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान मस्जिद समिति का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी और हिंदू पक्षों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अपनी दलीलें रखीं।
उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अदालत को बताया कि राज्य पक्ष दोनों पक्षों के दावों में नहीं पड़ना चाहता है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध और बाध्य है। इसके साथ ही उन्होंने उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 के प्रावधानों का भी हवाला दिया।
उपासना स्थल अधिनियम और अदालत के पिछले निर्देश
यह 1991 का कानून किसी भी उपासना स्थल के स्वरूप को बदलने पर रोक लगाता है और 15 अगस्त 1947 को इसके धार्मिक चरित्र को बनाए रखने का प्रावधान करता है। वरिष्ठ अधिवक्ता अहमदी ने दलील दी कि इस अधिनियम की व्याख्या से जुड़ा मुद्दा शीर्ष अदालत की एक बड़ी पीठ के समक्ष लंबित है। शीर्ष अदालत ने 12 दिसंबर 2024 को एक महत्वपूर्ण आदेश में देश भर की अदालतों को निर्देश दिया था कि वे धार्मिक स्थलों से जुड़े नए मुकदमों पर विचार न करें।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संभल अदालत द्वारा दिए गए सर्वेक्षण के खिलाफ मस्जिद समिति की याचिका को खारिज कर दिया था और सिविल कोर्ट के सर्वे के निर्देश को बरकरार रखा था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि अदालत आयुक्त की नियुक्ति का आदेश और मुकदमा दोनों विचारणीय हैं। अब सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।


