उत्तराखंड: पांच करोड़ की लागत से बना मॉडल पशु चिकित्सालय डेढ़ साल बाद भी सुविधाओं से वंचित
उत्तरकाशी जनपद के इकलौते मॉडल पशु चिकित्सालय का भवन तैयार हुए करीब डेढ़ साल का समय बीत चुका है, लेकिन पांच करोड़ रुपये की लागत से बने इस अस्पताल का पूरा लाभ अब तक क्षेत्र के पशुपालकों को नहीं मिल पा रहा है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस किए जाने वाले इस संस्थान में अभी तक एडवांस सर्जरी, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी लैब जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं पूरी तरह से शुरू नहीं हो सकी हैं।

अस्पताल का भवन तैयार, लेकिन उपकरण नदारद
मॉडल पशु चिकित्सालय का निर्माण पूरा होने के बाद इसे पशुपालन विभाग को सौंपा जा चुका है। नौगांव क्षेत्र में स्थित इस अस्पताल से नौगांव के अलावा मोरी, पुरोला, भटवाड़ी, डुंडा और चिन्यालीसौड़ क्षेत्र के हजारों पशुपालकों को बड़ी उम्मीदें थीं। उन्हें लगा था कि गंभीर बीमारियों और जटिल मामलों के इलाज के लिए अब उन्हें दूर-दराज के केंद्रों पर नहीं जाना पड़ेगा। हालांकि, जरूरी मशीनरी और उपकरणों की उपलब्धता न होने के कारण यह सपना अभी तक अधूरा है।
पशुपालकों को उठाना पड़ रहा है अतिरिक्त खर्च
प्रोग्रेसिव डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन के जिला प्रभारी जय प्रकाश थपलियाल ने बताया कि अस्पताल के निर्माण से बेहतर उपचार की आस जगी थी, खासकर दुधारू और बड़े पशुओं के मामलों में। लेकिन उन्नत सुविधाएं न मिलने के कारण पशुपालकों को आज भी अपने मवेशियों के इलाज के लिए दूसरे स्थानों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों अधिक खर्च हो रहे हैं।

निदेशालय से मशीनें मिलने का इंतजार
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. हरि सिंह बिष्ट का कहना है कि एडवांस सर्जरी के लिए जरूरी मशीनें निदेशालय स्तर से فراہم की जानी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि अगले पंद्रह दिनों से एक महीने के भीतर मशीनें मिल जाएंगी, जिसके बाद अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी। फिलहाल, क्षेत्र के पशुपालक आवश्यक उपकरणों के आने और अस्पताल के पूरी क्षमता से शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


