मतदाता सूची पुनरीक्षण पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा
भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विवाद के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया है। आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर एकतरफा निर्णय लेने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी फैसले पूरी तरह से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए
उप चुनाव आयुक्त द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से संबंधित सभी आदेश आपसी सहमति और पूर्ण विचार-विमर्श के बाद जारी किए गए थे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि फाइलों की प्रक्रिया के दौरान दर्ज किए जाने वाले नोट, सुझाव या टिप्पणियां अपने आप में अंतिम निर्णय नहीं होते हैं, और वैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही मामलों पर निर्णय लिए जाते हैं।
फॉर्म छह और घोषणा-पत्र पूरी तरह अलग
आयोग ने अपने हलफनामे में यह भी साफ किया कि मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित फॉर्म छह में किसी प्रकार का कोई संशोधन नहीं किया गया है। पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान उपयोग किया जाने वाला घोषणा-पत्र एक अलग दस्तावेज है, जिसका मुख्य उद्देश्य आवेदक के विवरण का पुराने मतदाता रिकॉर्ड से मिलान करना है। ऑनलाइन आवेदन के दौरान प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए अब इन्हें अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शित किया जा रहा है।
व्यक्तिगत सुनवाई और दस्तावेजों की प्रक्रिया
हलफनामे में जानकारी दी गई है कि पुराने रिकॉर्ड में नाम न मिलने की स्थिति में मतदाताओं को आमतौर पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। बूथ लेवल अधिकारी स्वयं घर-घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करेंगे। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही व्यक्तिगत सुनवाई की आवश्यकता पड़ सकती है। आयोग ने अदालत से इन तर्कों के आधार पर याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया है।


