मद्रास उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति की जब्ती को अनिवार्य बनाने पर दिया जोर

मद्रास उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति की जब्ती को अनिवार्य बनाने पर दिया जोर

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा भ्रष्टाचार के जरिए अर्जित संपत्तियों की जब्ती को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। अदालत ने देश में भ्रष्टाचार पर लगाम कसने और इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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एक मामले की सुनवाई के दौरान आया फैसला

यह टिप्पणी तिरुचिरापल्ली के एक पूर्व सब-रजिस्ट्रार वी. थंगावेल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आई। याचिकाकर्ता ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें और उनकी पत्नी को रिश्वतखोरी के एक मामले में दोषी ठहराते हुए उनकी संपत्ति जब्त करने का निर्देश दिया गया था। यह मामला सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय (DVAC) द्वारा दर्ज किया गया था।

मामلا की सुनवाई न्यायमूर्ति बी. पुगझेंधी की पीठ ने की। अदालत ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संपत्ति की जब्ती से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं और इस तरह के जब्ती आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं माना जा सकता है।

कानून में संशोधन की जरूरत पर बल

अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार और भ्रष्ट आचरण को किसी भी अन्य अपराध की तुलना में अधिक गंभीरता से देखा जाना चाहिए। समाज के विभिन्न हिस्सों में फैल चुके भ्रष्टाचार से निपटने के लिए संपत्तियों की अनिवार्य जब्ती बेहद आवश्यक है। न्यायालय का यह भी सुझाव था कि 1988 से लागू भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में उचित संशोधन किए जाने चाहिए ताकि जब्ती से जुड़े प्रावधानों को और अधिक मजबूत किया जा सके।

अदालत ने कहा कि ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति जुटाने जैसे मामलों में भ्रष्ट तरीकों से हासिल की गई संपत्ति को जब्त करना अनिवार्य होना चाहिए। इस प्रकार के प्रावधानों से अधिकारियों में डर पैदा होगा और वे गलत तरीकों से संपत्ति इकट्ठा करने से बचेंगे, अन्यथा ऐसे नियम केवल कागजों पर ही सीमित रह जाएंगे। अदालत ने उम्मीद जताई कि सरकार इस दिशा में पहल करेगी और कानून को अधिक प्रभावी बनाएगी।

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