चुनाव आयोग ने ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण में फॉर्म और घोषणा पत्र को किया अलग

चुनाव आयोग ने ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण में फॉर्म और घोषणा पत्र को किया अलग

भारतीय निर्वाचन आयोग ने ऑनलाइन माध्यम से नए मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म 6 और उसके साथ दिए जाने वाले घोषणा पत्र को अलग-अलग कर दिया है। यह बदलाव उन राज्यों में लागू किया गया है जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चल रही है। इससे पहले डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इन दोनों दस्तावेजों को एक साथ प्रस्तुत किया जाता था।

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ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में किया गया बदलाव

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, पहले आवेदकों को परिचालन संबंधी सुविधा के लिए एक ही ओटीपी और ई-साइन के माध्यम से फॉर्म 6 और घोषणा पत्र एक साथ जमा करने की अनुमति थी। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर यह सुझाव सामने आए थे कि आयोग ने बिना केंद्रीय कानून मंत्रालय की अनुमति के फॉर्म में बदलाव कर दिया है। नई संशोधित प्रक्रिया के तहत अब दोनों दस्तावेजों को अलग-अलग जमा करना होगा, जिसके लिए अलग ओटीपी और ई-साइन सत्यापन की आवश्यकता होगी। आवेदकों को सफलतापूर्वक आवेदन पूरा करने के लिए दोनों चरणों को पूरा करना अनिवार्य है।

शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे का संदर्भ

शीर्ष अदालत में दाखिल अपने हालिया जवाबी हलफनामे में निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया था कि चुनावी रोल डिवीजन के एक फैसले के अनुसार, भौतिक (ऑफलाइन) प्रस्तुतिकरण की तरह ही ऑनलाइन आवेदनों को भी दो अलग-अलग भागों में बांटा जाएगा। इसमें पहला हिस्सा नियमों के तहत निर्धारित फॉर्म 6 होगा और दूसरा हिस्सा एसआईआर घोषणा पत्र होगा। आयोग ने उन राज्यों में डिजिटल प्लेटफॉर्म से घोषणा पत्र पहले ही हटा दिया था जहां विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

मतदाताओं के लिए स्पष्टीकरण

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम मसौदा एसआईआर सूचियों में नहीं हैं, वे नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म 6 जमा कर सकते हैं। यह स्पष्टीकरण उन चिंताओं के बीच आया है जिनमें पुराने मतदाताओं का मानना था कि पहली बार नाम जुड़वाने से संबंधित घोषणा वाले फॉर्म 6 को भरने से उन्हें गलत घोषणा के आरोप में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच, चुनाव प्रक्रिया और दस्तावेजों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

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